Thursday, March 5, 2026

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उत्तराखंड बनेगा देश का ‘स्वच्छ ऊर्जा हब’: ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को मिली कैबिनेट की मंजूरी; 5 साल में 100 किलोटन उत्पादन का लक्ष्य

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति पर मुहर लगाई गई। इस नीति के तहत राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों के भीतर प्रति वर्ष 100 किलोटन (1 लाख मीट्रिक टन) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल प्रदेश में भारी निवेश आएगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए ‘ग्रीन जॉब्स’ के नए द्वार भी खुलेंगे।

नीति के मुख्य स्तंभ: सब्सिडी और रियायतें

निवेशकों को आकर्षित करने और उत्पादन लागत को कम करने के लिए राज्य सरकार ने आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) की घोषणा की है:

  • पूंजीगत सहायता: ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित करने वाली शुरुआती इकाइयों को भारी निवेश सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • बिजली शुल्क में छूट: इस क्षेत्र में काम करने वाले उद्योगों को 5 से 10 वर्षों तक बिजली शुल्क (Electricity Duty) और ‘इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन’ शुल्कों में शत-प्रतिशत छूट दी जा सकती है।
  • स्टाम्प ड्यूटी और लैंड कन्वर्जन: प्लांट के लिए जमीन खरीदने या पट्टे पर लेने पर स्टाम्प ड्यूटी और भूमि परिवर्तन शुल्क में पूरी तरह माफी दी जाएगी।

क्या है लक्ष्य और विजन?

  1. सालाना 100 किलोटन उत्पादन: सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक उत्तराखंड सालाना 100 किलोटन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने लगे, जिससे उद्योगों की जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम हो।
  2. रोजगार सृजन: इस नीति के माध्यम से अगले पांच सालों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
  3. कार्बन फुटप्रिंट में कमी: ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से राज्य के परिवहन और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा।

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति का लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड के पास प्रचुर मात्रा में जल संसाधन और पनबिजली (Hydro Power) की सुविधा है। ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए ‘इलेक्ट्रोलिसिस’ प्रक्रिया में नवीकरणीय ऊर्जा और पानी की आवश्यकता होती है, जो उत्तराखंड में आसानी से उपलब्ध है। सरकार चाहती है कि राज्य की बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयों से जोड़ा जाए।

किन क्षेत्रों को होगा फायदा?

  • भारी परिवहन: बस और ट्रकों में ईंधन के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जाएगा।
  • उर्वरक और स्टील उद्योग: राज्य में स्थित औद्योगिक इकाइयों को ग्रीन हाइड्रोजन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • स्वच्छ गंगा मिशन: इस नीति से गंगा बेसिन के पास स्थित उद्योगों में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक ढांचा और निगरानी

इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ‘स्टेट ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ का गठन किया जाएगा, जिसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जाएगी। निवेशकों की सुविधा के लिए एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ विकसित किया जाएगा ताकि प्रोजेक्ट्स को जल्द से जल्द क्लीयरेंस मिल सके।

“ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 उत्तराखंड को हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेगी। हम अपनी प्राकृतिक संपदा का दोहन इस प्रकार करेंगे कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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