Monday, January 12, 2026

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उत्तराखंड: प्री-बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान, मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शेड्यूल जारी

देहरादून। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 10वीं और 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। शिक्षा विभाग ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैदानी और पहाड़ी जिलों के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की हैं। इस निर्णय का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों की तैयारी का सटीक आकलन करना है।

मैदानी जिलों में पहले शुरू होंगी परीक्षाएं

शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों के साथ-साथ अन्य जनपदों के मैदानी क्षेत्रों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू कर दी जाएंगी। विभाग की कोशिश है कि मुख्य बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों को उनके कमजोर विषयों की पहचान करने का पर्याप्त समय मिल सके।

पहाड़ी क्षेत्रों के लिए फरवरी का समय

दुर्गम और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी की संभावना को देखते हुए वहां का शेड्यूल थोड़ा अलग रखा गया है। पहाड़ी जिलों में ये परीक्षाएं फरवरी के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जा सकती हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समय-सारणी तैयार करें ताकि किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुँचने में असुविधा न हो।

उत्तर पुस्तिकाओं का होगा मूल्यांकन और फीडबैक

प्री-बोर्ड परीक्षा केवल एक औपचारिक अभ्यास नहीं होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाओं के तुरंत बाद शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर छात्रों को उनका प्रदर्शन बताना होगा। जिन विषयों में छात्र कमजोर पाए जाएंगे, उनके लिए विशेष ‘एक्स्ट्रा क्लास’ या ‘रेमेडियल टीचिंग’ की व्यवस्था की जाएगी। इससे बोर्ड परीक्षा के परिणामों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

तैयारी के लिए निर्देश जारी

शिक्षा महानिदेशक ने सभी स्कूलों को निर्देशित किया है कि प्री-बोर्ड परीक्षाओं का प्रश्न पत्र पूरी तरह से बोर्ड के पैटर्न पर आधारित होना चाहिए। इससे छात्रों का परीक्षा के प्रति डर (Exam Fear) कम होगा और उन्हें समय प्रबंधन (Time Management) सीखने में मदद मिलेगी। साथ ही, सभी स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पाठ्यक्रम पूरा करने के भी सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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