देहरादून।
उत्तराखंड परिवहन निगम इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। निगम की वित्तीय हालत इतनी बिगड़ गई है कि उसके सामने रोजाना के खर्च और वेतन भुगतान तक की चुनौती खड़ी हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं।
लगातार बढ़ रहा घाटा
सूत्रों के मुताबिक, निगम लंबे समय से घाटे में चल रहा है। डीजल की बढ़ती कीमतें, घटती सवारियां और रखरखाव का भारी खर्च इसकी प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। कई रूटों पर बसें भराव क्षमता तक यात्रियों को आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। साथ ही, कोविड काल के बाद से अब तक निगम पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है।
त्योहारों से पहले सख्ती
त्योहारों के सीजन को देखते हुए निगम प्रबंधन ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने ड्यूटी प्वाइंट पर मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। छुट्टियों पर रोक लगाने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा है। निगम का मानना है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और अगर सेवाएं सुचारु रहीं तो राजस्व में सुधार की संभावना बनेगी।
प्रबंधन ने मानी दिक्कतें
निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। “हमारे पास खर्च की तुलना में आय बेहद कम है। कर्मचारियों की छुट्टियां रोकना मजबूरी का कदम है ताकि बस सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए। हम प्रयास कर रहे हैं कि जल्द ही स्थिति पर काबू पाया जाए।”
कर्मचारियों में असंतोष
दूसरी ओर, छुट्टियां रद्द होने से कर्मचारियों में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते कामकाज और वित्तीय अनिश्चितता से मानसिक दबाव बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने मांग की है कि सरकार निगम की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए।
सरकार से राहत की उम्मीद
जानकारों का कहना है कि अगर राज्य सरकार से जल्द वित्तीय पैकेज या सब्सिडी नहीं मिली, तो निगम की हालत और बिगड़ सकती है। परिवहन निगम राज्य के दूर-दराज के इलाकों में आवागमन की रीढ़ है। ऐसे में, इसके आर्थिक संकट का असर सीधा आम जनता पर पड़ेगा।





