देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राज्य की समृद्ध साहित्यिक विरासत और स्थानीय बोली-भाषाओं के संरक्षण और संवर्द्धन के प्रति अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। राजधानी देहरादून के मुख्य सेवक सदन में आयोजित भव्य ‘उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने न केवल देश की सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने के महत्त्व पर जोर दिया, बल्कि राज्य के प्रमुख साहित्यकारों और उनकी कृतियों को भी सम्मानित किया। यह समारोह प्रदेश की साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक चेतना और साहित्यकारों के प्रति सम्मान का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ऐतिहासिक अनदेखी का अंत
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में देश के इतिहास के एक काले अध्याय की ओर इशारा करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की अमूल्य साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को तोड़ने-मरोड़ने का कुत्सित काम किया था। उन्होंने गहरा असंतोष व्यक्त किया कि स्वतंत्रता के बाद भी, इस महत्त्वपूर्ण विरासत को सहेजने के बजाय लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि अब देश अपनी वास्तविक सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है और साहित्यिक धरोहर को पुनर्स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।
उत्तराखंड की बिखरी विरासत का संकलन और संरक्षण
इसी राष्ट्रीय विज़न से प्रेरित होकर, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार भी राज्य की बिखरी हुई सांस्कृतिक धरोहर को संकलित और संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय बोली-भाषाओं (जैसे कुमाऊँनी, गढ़वाली, और जौनसारी) के संरक्षण में पूरी निष्ठा से जुटी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर नागरिक अपनी समृद्ध और विविध विरासत पर गर्व महसूस कर सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि साहित्य और संस्कृति का संरक्षण-संवर्द्धन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, और इसके लिए साहित्यकारों को ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।
पावन धरा और महान साहित्यकारों का स्मरण
उत्तराखंड की पावन धरा को सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय, गंगा और यहां की अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता ने अनेक लेखकों व कवियों को प्रेरित किया है। उन्होंने इस अवसर पर सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे नामी साहित्यकारों का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने अपनी रचनाओं से उत्तराखंड का नाम रोशन किया। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में भी साहित्यकारों व कवियों के महत्त्वपूर्ण योगदान को याद किया और कहा कि उनकी कलम ने समाज में जागृति लाने का काम किया।
डा. जितेन ठाकुर को ‘उत्तराखंड साहित्य भूषण’ सम्मान
समारोह के दौरान, मुख्यमंत्री ने कई प्रमुख साहित्यकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। उत्तराखंड साहित्य भूषण से सम्मानित डा. जितेन ठाकुर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डा. ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों का आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से राज्य की अद्वितीय सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाएं और एक सशक्त व समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण में अपना योगदान दें। यह समारोह उत्तराखंड के साहित्यिक समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक क्षण रहा।





