देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल और उद्यमिता (Entrepreneurship) से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग और ‘उद्यम लर्निंग फाउंडेशन’ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस अनुबंध के तहत राज्य के विभिन्न सरकारी विद्यालयों के लगभग दो लाख छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘स्वरोजगार से आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने इस व्यापक योजना का खाका तैयार किया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य: छात्रों को ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ बनाना
शिक्षा विभाग और फाउंडेशन के बीच हुए इस अनुबंध का प्राथमिक लक्ष्य छात्रों की सोच में बदलाव लाना है:
- उद्यमिता विकास: कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा के साथ-साथ यह सिखाया जाएगा कि कैसे छोटे-छोटे नवाचारों (Innovation) के जरिए स्वयं का उद्यम शुरू किया जा सकता है।
- प्रैक्टिकल लर्निंग: केवल थ्योरी के बजाय, छात्रों को प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग के माध्यम से बाजार की मांग और व्यापार की बारीकियों को समझने का अवसर मिलेगा।
- शिक्षकों का प्रशिक्षण: योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए फाउंडेशन द्वारा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे छात्रों को सही मार्गदर्शन दे सकें।
कैसे काम करेगा यह अनुबंध? चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार
इस साझेदारी को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:
- प्रथम चरण: शुरुआती दौर में राज्य के उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम पहले से संचालित हैं।
- पाठ्यक्रम में शामिल: कौशल विकास के सत्रों को नियमित स्कूल टाइम टेबल का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि छात्रों की मुख्य पढ़ाई पर असर न पड़े।
- करियर काउंसलिंग: छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पर्यटन, आईटी, कृषि और हस्तशिल्प) में कौशल विकसित करने में मदद की जाएगी।
शिक्षा मंत्री का बयान: “युवाओं के सपनों को मिलेगी नई उड़ान”
उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री ने इस अनुबंध को राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक ‘गेम-चेंजर’ बताया है:
- आत्मनिर्भरता की ओर कदम: उन्होंने कहा कि इस पहल से छात्र स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद न केवल नौकरी के लिए तैयार होंगे, बल्कि वे खुद का छोटा रोजगार शुरू करने के काबिल भी बनेंगे।
- पलायन पर रोक: सरकार को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने से भविष्य में पहाड़ों से होने वाले युवाओं के पलायन में कमी आएगी।





