देहरादून। उत्तराखंड के हिमाच्छादित और अति दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में जनगणना का काम 1 सितंबर से शुरू हो रहा है। बर्फ से ढके इलाकों में रहने वाले परिवारों तक पहुंचकर उनकी जानकारी दर्ज करने के लिए प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। पहले चरण में राज्य के चार जिलों के 131 से अधिक बर्फीले गांवों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में करीब 52 हजार लोगों की जानकारी जुटाई जानी है।
जनगणना के लिए 182 प्रगणकों और सुपरवाइजरों की तैनाती की गई है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कर्मचारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार काम करने की योजना तैयार की गई है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि कठिन रास्तों और सीमित संचार सुविधाओं के बावजूद कोई भी परिवार जनगणना से बाहर न रहे।
घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी
प्रगणक गांवों में घर-घर जाकर परिवारों से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज करेंगे। इसमें परिवार के सदस्यों की सामान्य जानकारी के साथ भाषा, धर्म, आर्थिक स्थिति और पलायन जैसे विषयों से जुड़े आंकड़े भी शामिल होंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की विस्तृत तस्वीर सामने आने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में लोगों को स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी गई है, लेकिन दुर्गम इलाकों में इंटरनेट और कनेक्टिविटी की समस्या के कारण स्वगणना में अपेक्षित भागीदारी नहीं हो सकी है। ऐसे में अब घर-घर जाकर जानकारी जुटाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कठिन इलाकों के लिए विशेष व्यवस्था
जनगणना निदेशालय ने दूरस्थ गांवों तक पहुंचने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष कार्ययोजना तैयार की है। अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है। बर्फबारी और कठिन मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान सुरक्षा और आवागमन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राज्य के सामान्य क्षेत्रों में जनगणना की तैयारियां भी जारी हैं। अधिकारियों के अनुसार, हिमाच्छादित क्षेत्रों में पहले चरण का यह अभियान आगामी व्यापक जनगणना प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।





