देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और ‘लोकल से ग्लोबल’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य के उत्पादों के निर्यात (Export) को बढ़ावा देने के लिए अब प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण (Skill Development Training) से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर तैयार इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को न केवल हुनरमंद बनाना है, बल्कि उन्हें निर्यात प्रक्रिया की बारीकियों को सिखाकर स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना भी है।
निर्यात और कौशल विकास का ‘हब’ बनेगा उत्तराखंड
राज्य सरकार का फोकस उन क्षेत्रों पर है जहाँ उत्तराखंड के पास प्राकृतिक और सांस्कृतिक बढ़त है:
- स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग: पहाड़ी दालें, औषधीय पौधे, हस्तशिल्प और सुगंधित तेलों (Aromatic Oils) के निर्यात की अपार संभावनाओं को देखते हुए युवाओं को इनके प्रसंस्करण (Processing) और पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन: निर्यात बढ़ाने के लिए युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ‘सप्लाई चेन मैनेजमेंट’ और ‘क्वालिटी कंट्रोल’ के गुर सिखाए जाएंगे।
स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम
सरकार केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए कई स्तरों पर सहायता प्रदान कर रही है:
- वित्तीय सहायता: प्रशिक्षित युवाओं को अपना स्टार्टअप या लघु उद्योग शुरू करने के लिए ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ के तहत प्राथमिकता के आधार पर ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।
- निर्यात केंद्रों की स्थापना: जिला स्तर पर ‘एक्सपोर्ट हब’ विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ युवा अपने उत्पादों की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन आसानी से करा सकेंगे।
- डिजिटल मार्केटिंग प्रशिक्षण: वैश्विक बाजार तक पहुँच बनाने के लिए युवाओं को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करने और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से विदेशी ग्राहकों से जुड़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पलायन रोकने में मददगार होगी योजना
राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने के लिए यह योजना एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है:
- गांव में रोजगार: जब गांव के उत्पादों का निर्यात विदेशों में होगा, तो युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
- कौशल विकास केंद्रों का विस्तार: प्रदेश के हर ब्लॉक में कौशल विकास केंद्रों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि सुदूर क्षेत्रों के युवाओं को आधुनिक मशीनों और तकनीकों की जानकारी मिल सके।





