Friday, February 20, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

उत्तराखंड के इस बैंक पर मंडराया संकट: डूबने की कगार पर करोड़ों की पूंजी; RBI की पाबंदियों के बाद खाताधारकों में मची अफरा-तफरी

देहरादून/हल्द्वानी: उत्तराखंड के बैंकिंग क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। राज्य का एक प्रमुख सहकारी बैंक (Co-operative Bank) भारी वित्तीय घाटे और अनियमितताओं के चलते डूबने के कगार पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंक की बिगड़ती माली हालत को देखते हुए कई सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, जिसके बाद हजारों खाताधारकों के करोड़ों रुपये दांव पर लग गए हैं। बैंक की शाखाओं के बाहर सुबह से ही जमाकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो अपनी जीवन भर की कमाई को लेकर आशंकित हैं।

संकट की मुख्य वजह: बेहिसाब NPA और कुप्रबंधन

बैंकिंग विशेषज्ञों और ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट के पीछे कई गंभीर कारण जिम्मेदार हैं:

  • अनियंत्रित एनपीए (NPA): बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में बिना पर्याप्त गारंटी के बड़े लोन बांटे, जिनकी वसूली नहीं हो पाई। वर्तमान में बैंक का ‘नॉन-परफॉर्मिंग एसेट’ (NPA) सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक ऊपर निकल गया है।
  • वित्तीय अनियमितताएं: ऑडिट में सामने आया है कि बैंक के प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर निवेश किया और कई संदिग्ध लेन-देन किए, जिससे बैंक की पूंजी (Capital) पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में आ गई है।
  • RBI का कड़ा एक्शन: बैंक की नेटवर्थ निगेटिव होने के कारण, रिजर्व बैंक ने बैंक पर नए लोन देने और नई जमा स्वीकार करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

खाताधारकों के लिए क्या हैं खतरे?

बैंक पर लगी पाबंदियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है:

  1. निकासी पर सीमा: आरबीआई ने प्रति खाताधारक निकासी की एक अधिकतम सीमा (Limit) तय कर दी है, जिससे लोग अपनी जरूरत के बावजूद अपना पूरा पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं।
  2. DICGC कवर का सहारा: नियमानुसार, यदि बैंक पूरी तरह विफल होता है, तो ‘जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम’ (DICGC) के तहत केवल 5 लाख रुपये तक की जमा राशि ही सुरक्षित है। जिन खाताधारकों ने इससे अधिक रकम जमा की है, उनके बाकी पैसों पर खतरा मंडरा रहा है।
  3. रुकी हुई ईएमआई और ट्रांजेक्शन: बैंक के सर्वर और चेक क्लियरिंग सिस्टम में आ रही बाधाओं के कारण व्यापारियों और वेतनभोगियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार और प्रशासन की भूमिका

राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सहकारिता विभाग को जांच के आदेश दिए हैं:

  • मर्जर की संभावनाएं: चर्चा है कि इस डूबते बैंक को बचाने के लिए इसका विलय (Merger) किसी बड़े सरकारी बैंक या मजबूत राज्य सहकारी बैंक में किया जा सकता है।
  • दोषियों पर कार्रवाई: सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंक की इस हालत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निदेशक मंडल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनकी संपत्तियां कुर्क की जा सकती हैं।

Popular Articles