चंद्रापुरी (रुद्रप्रयाग)। उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में अपनी जड़ें दोबारा मजबूत करने के संकल्प के साथ उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए हुंकार भर दी है। रविवार को चंद्रापुरी-स्यालसौड़ में आयोजित पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि उक्रांद प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। दल के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी बड़े राष्ट्रीय दल के बजाय जनता के भरोसे और क्षेत्रीय मुद्दों के आधार पर चुनावी समर में उतरेगी।
उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रचार की रणनीति
बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय नेतृत्व ने चुनावी तैयारियों का खाका पेश किया।
- प्रत्याशियों का चयन: प्रत्येक विधानसभा सीट के लिए वर्तमान में चार-चार संभावित दावेदारों के नाम चिन्हित किए जा रहे हैं। पार्टी हाईकमान गहन समीक्षा के बाद इनमें से सबसे मजबूत और बेदाग छवि वाले एक उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा।
- जनसंपर्क अभियान: जनता से जुड़ने के लिए पार्टी ने “हर घर चर्चा, हर घर पर्चा” अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, पूरे प्रदेश में उक्रांद की विचारधारा और नीतियों के प्रचार के लिए एक भव्य रथ यात्रा निकालने की भी योजना बनाई गई है।
ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरा: ’26 साल बाद भी समस्याएं जस की तस’
बैठक के दौरान राज्य की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और सत्तारूढ़ दलों पर तीखे प्रहार किए गए।
- बुनियादी चुनौतियां: उक्रांद नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी बेरोजगारी, पलायन, बदहाल स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे हल नहीं हो पाए हैं। पार्टी ने वादा किया कि वह इन मुद्दों को अपने घोषणापत्र का मुख्य आधार बनाएगी।
- आर्थिक संकट और गैरसैंण: दल ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश कर्ज के बोझ तले दब गया है। साथ ही, ‘गैरसैंण’ को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर सरकार द्वारा की गई कथित वादाखिलाफी को लेकर भी कड़ा विरोध जताया गया।
सीमित संसाधन, असीमित जनसमर्थन
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने माना कि उनकी आर्थिक स्थिति राष्ट्रीय दलों जैसी सुदृढ़ नहीं है, लेकिन जनता का बढ़ता रुझान उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
“भले ही हमारे पास धनबल की कमी हो, लेकिन उत्तराखंड की स्वाभिमानी जनता का समर्थन हमारे साथ है। कई गैर-राजनीतिक संगठनों का साथ मिलना यह दर्शाता है कि प्रदेश में अब क्षेत्रीय विकल्प की स्वीकार्यता बढ़ रही है। आने वाले समय में उक्रांद की सरकार बनना तय है।” — केंद्रीय नेतृत्व, उक्रांद
बैठक में दिग्गजों की मौजूदगी
इस रणनीतिक बैठक में दल के तमाम बड़े चेहरे एक मंच पर नजर आए। केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी, पुष्पेश त्रिपाठी, और कर्नल सुनील कोटनाला सहित डॉ. शक्ति शैल कप्रवाण, चंद्रशेखर कापड़ी, और शांति प्रसाद भट्ट जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन किरण रावत ने किया और आयोजन की कमान केंद्रीय महामंत्री देवेंद्र चमोली ने संभाली।





