वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को राष्ट्र के नाम एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और कड़ा संबोधन दिया। अपने 20 मिनट के इस भाषण में, ट्रम्प ने न केवल ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी, बल्कि अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके प्रशासन द्वारा किए गए ‘ईरान परमाणु समझौते’ (Iran Nuclear Deal) को एक ‘बड़ी गलती’ (Great Mistake) करार दिया। उन्होंने ओबामा प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के मामले में एक गंभीर भूल की, जिसका खामियाज़ा देश को भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स गलती को सुधारने और देशहित में कड़े फैसले लेने का सम्मान प्राप्त किया है।
ओबामा प्रशासन पर तीखा हमला: ईरान परमाणु समझौते को बताया ‘बड़ी गलती’
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने संबोधन में बराक ओबामा का नाम लिए बिना उन पर सीधा और कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “उन्होंने ईरान के मामले में गलती की” और उनके प्रशासन द्वारा 2015 में किया गया ‘ईरान परमाणु समझौता’ (JCPOA) एक “अत्यंत विनाशकारी भूल” (Highly Destructive Mistake) थी। ट्रम्प ने ओबामा प्रशासन पर ईरान को अरबों डॉलर की राशि प्रदान करने और उसे परमाणु हथियार विकसित करने के लिए एक “खुला रास्ता” (Open Path) देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने ईरान को आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने और क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने के लिए “खुला लाइसेंस” (Open License) प्रदान किया, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएँ पैदा हुईं।
देशहित में कड़े फैसले: “मैंने गलती को सुधारने का सम्मान प्राप्त किया”
ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वे ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति कभी नहीं देंगे और अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।
ईरान को कड़ी चेतावनी और शांति वार्ता की अपील: “हम युद्ध नहीं चाहते”
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने संबोधन में ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी और कहा कि अमेरिका किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई का कड़ा जवाब देगा। उन्होंने ईरान को “आतंकवाद का प्रमुख प्रायोजक” (State Sponsor of Terrorism) करार दिया और कहा कि “अगर ईरान युद्ध चाहता है, तो यह ईरान का आधिकारिक अंत होगा।” हालांकि, ट्रम्प ने अपने संबोधन में शांति वार्ता की अपील भी की और कहा कि “हम युद्ध नहीं चाहते” और वे ईरान के साथ एक “नया और बेहतर समझौता” (New and Better Deal) बनाने के लिए तैयार हैं, जो देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता को मज़बूत करेगा। उन्होंने ईरान से आतंकवादी गतिविधियों को रोकने और शांति व स्थिरता बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने की अपील की।




