Wednesday, March 4, 2026

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ईरान में कोहराम: प्रदर्शनों में अब तक 648 लोगों की मौत, 10 हजार से अधिक गिरफ्तार; सुलग रहे कई शहर, दमन के बावजूद नहीं थम रहा आक्रोश

तेहरान/दुबई: ईरान में हिजाब विवाद और नागरिक अधिकारों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक जन-क्रांति में तब्दील हो चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 648 हो गई है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, पूरे देश से 10 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरान के कई प्रमुख शहरों में आगजनी, पत्थरबाजी और गोलीबारी की खबरें आ रही हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित बनी हुई है।

देशभर में हिंसा का तांडव: कई शहर बने जंग के मैदान

ईरान की राजधानी तेहरान सहित मशहद, शिराज और इस्फ़हान जैसे शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं:

  • सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बल लाइव एम्युनिशन (असली गोलियों), पैलेट गन और आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • बढ़ता जन-आक्रोश: प्रदर्शनकारी “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सरकारी इमारतों और पुलिस चौकियों को निशाना बना रहे हैं।
  • कुर्दिश इलाकों में भारी तनाव: ईरान के पश्चिमी हिस्से में स्थित कुर्दिश बहुल इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण है, जहाँ मौतों का आंकड़ा सबसे तेजी से बढ़ रहा है।

दमन चक्र: गिरफ्तारियों और जेलों का खौफ

सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए बड़े पैमाने पर धरपकड़ शुरू कर दी है:

  1. सामूहिक गिरफ्तारियां: 10 हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी ने ईरान की जेलों में जगह कम कर दी है। इनमें पत्रकार, वकील, छात्र और जाने-माने कलाकार भी शामिल हैं।
  2. इंटरनेट पर पाबंदी: कई शहरों में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें और हिंसा की तस्वीरें दुनिया तक न पहुंचें।
  3. कठोर सजा की चेतावनी: ईरान की न्यायपालिका ने गिरफ्तार किए गए लोगों को ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ (Moharebeh) के आरोपों में मृत्युदंड तक की सजा देने की चेतावनी दी है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और प्रतिक्रिया

ईरान में हो रहे इस नरसंहार पर दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है:

  • संयुक्त राष्ट्र का हस्तक्षेप: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
  • प्रतिबंधों का दौर: अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान के ‘नैतिकता पुलिस’ (Morality Police) और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों पर नए कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
  • मानवाधिकार संगठनों की अपील: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि ईरान में सुरक्षा बल “मारने के इरादे” से गोलियां चला रहे हैं, जो कि मानवता के खिलाफ अपराध है।

निष्कर्ष: अनिश्चितता के मुहाने पर ईरान

ईरान सरकार इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों की साजिश बता रही है, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनके अस्तित्व और आजादी की लड़ाई है। 648 मौतों के बाद भी लोगों का पीछे न हटना इस बात का संकेत है कि ईरान एक बड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। फिलहाल, शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और आने वाले दिन ईरान के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे।

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