Friday, January 2, 2026

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ईरान में आक्रोश की आग: खामेनेई शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता, ‘मुल्लाओं को जाना होगा’ के नारों से दहला तेहरान

तेहरान/दुबई: इस्लामिक गणराज्य ईरान इस समय अपने दशकों के सबसे भीषण आंतरिक संकट से गुजर रहा है। देश के कोने-कोने में भड़की हिंसा की आग ने अब सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और वहां की धार्मिक सत्ता को चुनौती देना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी अब केवल सुधारों की मांग नहीं कर रहे, बल्कि ‘मुल्लाओं को जाना होगा’ और ‘तानाशाह की मौत’ जैसे कट्टर नारों के साथ सत्ता परिवर्तन की मांग पर अड़ गए हैं।

क्यों भड़की हिंसा की चिंगारी?

ईरान में इस व्यापक विरोध प्रदर्शन के पीछे कई गहरे कारण हैं, जो लंबे समय से जनता के बीच सुलग रहे थे:

  • मानवाधिकार और सख्त पाबंदियां: हिजाब कानून और नैतिकता पुलिस (Morality Police) की सख्ती ने महिलाओं और युवाओं के भीतर भारी असंतोष पैदा किया है।
  • आर्थिक बदहाली: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कुप्रबंधन के कारण ईरान की मुद्रा (रियाल) में भारी गिरावट आई है। आसमान छूती महंगाई और बेरोजगारी ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है।
  • राजनीतिक दमन: असहमति की आवाजों को दबाने और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग ने आग में घी डालने का काम किया है।

‘मुल्लाओं को जाना होगा’: नारों के पीछे का संदेश

ईरान में प्रदर्शनकारी अब पारंपरिक रूढ़िवादिता और धार्मिक शासन (Theocracy) के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। ‘मुल्लाओं को जाना होगा’ जैसे नारे यह दर्शाते हैं कि जनता अब देश के शासन में पादरियों और धार्मिक गुरुओं के हस्तक्षेप को समाप्त कर एक आधुनिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहती है।

  • युवाओं की भूमिका: इन प्रदर्शनों की कमान ईरान की नई पीढ़ी के हाथ में है, जो वैश्विक दुनिया से जुड़ना चाहती है और धार्मिक कट्टरपंथ के साये से बाहर निकलना चाहती है।
  • प्रतीकात्मक विरोध: सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब जलाना और धार्मिक नेताओं के पोस्टरों को फाड़ना शासन के प्रति गहरे गुस्से का प्रतीक बन गया है।

शासन का कड़ा रुख और हिंसा

ईरानी सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

  • इंटरनेट पर पाबंदी: दुनिया से संपर्क काटने के लिए देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं को ठप कर दिया गया है।
  • गिरफ्तारी और बल प्रयोग: रिपोर्टों के अनुसार, हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और झड़पों में कई लोगों की जान जा चुकी है। शासन इन प्रदर्शनों को ‘विदेशी साजिश’ और ‘दुश्मन देशों की चाल’ बता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

ईरान की इस स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। पश्चिमी देशों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को रोकने की अपील की है, जबकि ईरान ने इसे अपने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करार दिया है।

विशेष विश्लेषण: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने जनता की बुनियादी मांगों और आर्थिक सुधारों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन ईरान के राजनीतिक ढांचे की नींव हिला सकता है।

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