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ईरान में अमेरिकी पायलट का हैरतअंगेज रेस्क्यू: ट्रंप ने बताया कैसे तीन शब्दों ने बढ़ाई धड़कनें, पर अंत में बनी जान बचाने की वजह

वाशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान की सीमा के भीतर से एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के पायलट को सुरक्षित बाहर निकालने का एक बेहद साहसी और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान का खुलासा करते हुए बताया कि कैसे शुरुआत में पायलट के एक रेडियो संदेश ने अमेरिकी सेना के भीतर भ्रम और चिंता पैदा कर दी थी, जिसे ईरान की कोई चाल समझा गया था। हालांकि, गहन जांच और डिकोडिंग के बाद स्पष्ट हुआ कि पायलट सुरक्षित है और उसे एक जोखिम भरे सैन्य अभियान के जरिए सफलतापूर्वक बचा लिया गया।

‘ईश्वर की शक्ति’: वो तीन शब्द जिनसे शुरू हुआ भ्रम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान द्वारा गिराए गए F-15 लड़ाकू विमान के एक क्रू सदस्य (हथियार प्रणाली अधिकारी) के रेडियो संदेश ने शुरुआत में अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के होश उड़ा दिए थे।

  • बीपिंग जानकारी और संदेश: ट्रंप के अनुसार, विमान गिरने के बाद अमेरिका के पास अधिकारी के ठिकाने से जुड़ी ‘बीपिंग’ जानकारी आ रही थी। इसी दौरान पायलट की ओर से रेडियो पर एक छोटा और असामान्य संदेश मिला- ‘ईश्वर की शक्ति।’
  • ईरानी चाल का संदेह: ट्रंप ने कहा कि यह संदेश सुनकर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को लगा कि यह ऐसा वाक्य है जो आमतौर पर मुस्लिम संदर्भ में इस्तेमाल होता है। इससे यह गंभीर संदेह पैदा हुआ कि कहीं पायलट को ईरानी बलों ने पकड़ तो नहीं लिया है और वे अमेरिकी बलों को फंसाने के लिए झूठे संकेत तो नहीं भेज रहे हैं। कुछ समय के लिए यह आशंका भी जताई गई कि यह संदेश ईरान की किसी चाल का हिस्सा हो सकता है।

डिकोडिंग और पुष्टि: ‘भगवान अच्छा है’

हालांकि, बाद में एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट की। अधिकारी ने बताया कि असल में संदेश ‘भगवान अच्छा है’ (God is good) था, न कि ‘ईश्वर की शक्ति’।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान: “शुरुआत में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी और पायलट के संदेश को लेकर भ्रम था। लेकिन बाद में जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि पायलट जीवित है और सुरक्षित है। पायलट को जानने वाले लोगों ने बताया कि वह बेहद धार्मिक है, इसलिए उनका संदेश उनकी व्यक्तिगत आस्था के अनुरूप था। इसके बाद हालात की जांच की गई और धीरे-धीरे संदेह दूर हो गया।”

जांच और पुष्टि के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया कि पायलट सुरक्षित था और किसी के कब्जे में नहीं था। रक्षा अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि शुरुआत में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी, लेकिन बाद में जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि पायलट जीवित है और सुरक्षित है।

पहाड़ों में 24 घंटे का संघर्ष और खतरनाक रेस्क्यू

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह क्रू सदस्य ईरान के दुर्गम और पहाड़ी इलाके में घायल अवस्था में 24 घंटे से अधिक समय तक छिपा रहा। इस दौरान उसने खुद को दुश्मन के कब्जे से बचाए रखा और अपनी बहादुरी का परिचय दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी विमान को ईरानी बलों ने कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से गिराया था और उन्होंने विमान के क्रू सदस्य को भाग्यशाली बताया।

  • साहसी खोज एवं बचाव अभियान: ट्रंप ने इस मिशन को अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज एवं बचाव अभियानों में से एक बताया। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में अमेरिकी विशेष बलों को ईरान के अंदर तक भेजा गया, जहां से उन्होंने इस पायलट को सुरक्षित बाहर निकाला।
  • नेवी सील टीम सिक्स की भूमिका: इस अभियान में कुख्यात नेवी सील टीम सिक्स के कमांडो शामिल थे, जिन्होंने अत्यंत खतरनाक परिस्थितियों में इस रेस्क्यू को अंजाम दिया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने भी ईरानी काफिलों को दूर रखने के लिए कार्रवाई की ताकि रेस्क्यू टीम को सुरक्षित रास्ता मिल सके। अंततः यह मिशन सफल रहा और पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

इस हैरतअंगेज रेस्क्यू ऑपरेशन ने अमेरिकी सेना की बहादुरी और विशेषज्ञता को एक बार फिर साबित कर दिया है। यह पायलट की किस्मत और अमेरिकी विशेष बलों के साहस का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसने एक असंभव से दिखने वाले मिशन को मुमकिन कर दिखाया।

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