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ईरान-इजरायल युद्ध का असर: भारत में गहराया गैस संकट; पीएम मोदी ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग, घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्देश

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण संघर्ष का सीधा असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने लगा है। युद्ध के कारण देश में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक की। इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हुए, जहाँ अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षा देने के लिए एक ‘रणनीतिक योजना’ पर मुहर लगाई गई।

1. पीएम की बैठक: आपूर्ति बहाल रखने के लिए ‘एक्शन प्लान’

प्रधानमंत्री ने मंगलवार दोपहर को आयोजित इस बैठक में ईंधन की कीमतों और उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की।

  • घरेलू उपभोक्ताओं पर फोकस: सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहली प्राथमिकता घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) को दी जाएगी ताकि आम आदमी की रसोई प्रभावित न हो।
  • मंत्रालयों का समन्वय: विदेश मंत्रालय को वैकल्पिक समुद्री रास्तों और कूटनीतिक वार्ताओं के लिए सक्रिय किया गया है, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय को स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और स्टॉक की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य: भारत की दुखती रग

मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना है।

  • सामरिक महत्व: यह समुद्री मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘लाइफलाइन’ है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 62% हिस्सा इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।
  • ब्लॉक होने का कारण: अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई और ईरान के जोरदार पलटवार के बाद यह रास्ता फिलहाल जहाजों की आवाजाही के लिए असुरक्षित हो गया है। टैंकरों के रुकने से भारत तक पहुँचने वाली गैस की सप्लाई चेन टूट गई है।

3. भारत में गैस खपत का गणित

भारत में हर साल लगभग 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है, जिसे सरकार ने दो श्रेणियों में बांटा है:

  1. घरेलू क्षेत्र (Households): कुल खपत का 87% हिस्सा घरों में इस्तेमाल होता है। सरकार का पूरा जोर इसी हिस्से को संकट से बचाने पर है।
  2. व्यावसायिक क्षेत्र (Commercial): होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में 13% गैस का इस्तेमाल होता है। आपूर्ति में कमी आने पर सबसे पहले इसी क्षेत्र पर कटौती की जा रही है।

4. जमीनी हकीकत: कई राज्यों में दिखने लगा असर

युद्ध की आग ने भारतीय शहरों में आपूर्ति व्यवस्था को डगमगा दिया है:

  • कमर्शियल सप्लाई ठप: भोपाल और देहरादून जैसे शहरों में होटल और रेस्टोरेंट को मिलने वाले कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति रोक दी गई है।
  • उद्योगों पर मार: गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों में इंडस्ट्री को मिलने वाली गैस में 50% तक की कटौती की गई है।
  • होटलों के मेन्यू में बदलाव: गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण कई बड़े होटलों ने अपने मेन्यू से उन व्यंजनों को हटाना शुरू कर दिया है जिनमें अधिक ईंधन की खपत होती है।

5. सरकार के बड़े कदम: उत्पादन बढ़ाने का आदेश

संकट से निपटने के लिए सरकार ने दोतरफा रणनीति अपनाई है:

  • उत्पादन में तेजी: घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम स्तर पर ले जाने को कहा गया है।
  • वैकल्पिक स्रोत: भारत अब रूस और कुछ अन्य अफ्रीकी देशों से गैस आयात करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

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