श्रीहरिकोटा/बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए साल 2026 की शुरुआत निराशाजनक रही है। आज सुबह श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने वाला PSLV-C62 मिशन तकनीकी खराबी के कारण विफल हो गया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, रॉकेट ने शुरुआती चरणों में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम चरण (फोर्थ स्टेज) के दौरान इंजन में आई गड़बड़ी और ग्राउंड स्टेशन से डेटा संपर्क टूटने के कारण उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा (Orbit) तक नहीं पहुंच सका। इसरो प्रमुख ने मिशन की विफलता की पुष्टि करते हुए वैज्ञानिकों की एक उच्च स्तरीय टीम को जांच के आदेश दिए हैं।
कहाँ और कैसे हुई चूक? (तकनीकी खराबी की पूरी डिटेल)
इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा दी गई शुरुआती जानकारी के अनुसार, विफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:
- चौथे चरण का इग्निशन फेलियर: PSLV रॉकेट चार चरणों वाला वाहन है। इसके अंतिम चरण (PS4) के इंजन को कक्षा में उपग्रह छोड़ने के लिए जलना था, लेकिन निर्धारित समय पर इंजन का इग्निशन सफल नहीं हो पाया।
- डेटा लॉस (Data Loss): प्रक्षेपण के लगभग 15 मिनट बाद, जब रॉकेट पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर था, तब अचानक मिशन कंट्रोल सेंटर से उसका संपर्क टूट गया। डेटा न मिलने के कारण वैज्ञानिक रॉकेट की सटीक स्थिति का पता नहीं लगा सके।
- हीट शील्ड का अलग न होना: एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि रॉकेट की ऊपरी सुरक्षा परत (Heat Shield) सही समय पर अलग नहीं हुई, जिससे रॉकेट का वजन बढ़ गया और वह जरूरी वेग (Velocity) हासिल नहीं कर पाया।
बार-बार क्यों नाकाम हो रहे हैं मिशन?
पिछले कुछ समय में इसरो के कुछ मिशनों में आई अड़चनों ने विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। इसके पीछे कई संभावित कारण माने जा रहे हैं:
- जटिल नई तकनीक का परीक्षण: इसरो अब अपने पुराने ‘वर्कहॉर्स’ PSLV में नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर रहा है, जिससे तकनीकी जटिलता बढ़ गई है।
- सप्लाई चेन की चुनौतियां: कोरोना काल के बाद से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गुणवत्ता और आपूर्ति में आई वैश्विक दिक्कतों का असर अंतरिक्ष उपकरणों पर भी देखा जा रहा है।
- अत्यधिक व्यस्त शेड्यूल: साल में दर्जनों लॉन्च करने के दबाव के कारण कभी-कभी ‘क्वालिटी चेक’ (Quality Check) की प्रक्रियाओं में सूक्ष्म त्रुटियां रह जाने की आशंका बनी रहती है।
इस विफलता का क्या होगा असर?
- आगामी मिशनों पर ब्रेक: इस विफलता के बाद इसरो के आगामी बड़े मिशनों, जैसे ‘गगनयान’ के मानवरहित परीक्षणों में कुछ महीनों की देरी हो सकती है।
- कमर्शियल नुकसान: विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण के बाजार में भारत की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है, क्योंकि PSLV को दुनिया का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है।
इसरो का अगला कदम: ‘फेलियर एनालिसिस कमेटी’
इसरो ने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे हार नहीं मानेंगे। एक ‘फेलियर एनालिसिस कमेटी’ (FAC) का गठन किया गया है जो रॉकेट के हर सेकंड के डेटा का विश्लेषण करेगी। यह कमेटी देखेगी कि क्या खराबी किसी सॉफ्टवेयर बग (Bug) की वजह से थी या कोई मैकेनिकल पुर्जा विफल हुआ था।
निष्कर्ष: गिरकर संभलने का नाम है इसरो
भले ही PSLV-C62 विफल रहा हो, लेकिन इसरो का इतिहास रहा है कि वह हर विफलता से सीखकर और भी मजबूती से वापसी करता है। चंद्रयान-2 की विफलता के बाद चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। देश और दुनिया के वैज्ञानिक अब इसरो की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।





