Saturday, February 14, 2026

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इतिहास के पन्नों से नई खोज: मिस्र के शाही मकबरों में मिले 2000 साल पुराने ‘तमिल-ब्राह्मी’ शिलालेख; प्राचीन व्यापारिक रिश्तों के मिले पुख्ता सबूत

काहिरा/चेन्नई: पुरातत्व विज्ञान की दुनिया में एक बेहद चौंकाने वाला और गौरवशाली खुलासा हुआ है। मिस्र के लाल सागर तट पर स्थित प्राचीन बंदरगाहों और शाही मकबरों की खुदाई के दौरान विशेषज्ञों को 2000 साल पुराने ‘तमिल-ब्राह्मी’ शिलालेख मिले हैं। यह खोज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि ईसा पूर्व और ईसा की पहली शताब्दी के दौरान दक्षिण भारतीय व्यापारियों की पहुँच न केवल अरब देशों तक थी, बल्कि वे रोमन साम्राज्य के समय में मिस्र के साथ सक्रिय व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रखते थे।

खुदाई में क्या मिला: मिट्टी के बर्तनों पर खुदी प्राचीन लिपि

मिस्र के बेरेनिस (Berenike) और कुसीर अल-कादिम जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर की गई खुदाई में शोधकर्ताओं को निम्नलिखित अवशेष मिले हैं:

  • तमिल-ब्राह्मी लिपि: खुदाई में मिट्टी के बर्तनों के कुछ टुकड़े (Ostraca) मिले हैं, जिन पर तमिल-ब्राह्मी लिपि में नाम और निर्देश खुदे हुए हैं।
  • व्यापारियों के नाम: शिलालेखों पर ‘पाणई ओरी’ और ‘कणन’ जैसे नाम पाए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से दक्षिण भारतीय मूल के व्यक्तियों के होने की पुष्टि करते हैं।
  • प्राचीन तिथि: कार्बन डेटिंग और पुरालेखीय विश्लेषण से पता चला है कि ये शिलालेख पहली शताब्दी ईस्वी (1st Century AD) के हैं।

भारतीय व्यापारियों की लंबी समुद्री यात्रा का इतिहास

यह खोज साबित करती है कि प्राचीन काल में भारतीय नाविक और व्यापारी बेहद साहसी थे:

  1. मसालों का व्यापार: उस दौर में भारत से काली मिर्च, मोती, हाथीदांत और कीमती कपड़े (मलमल) मिस्र के रास्ते रोम भेजे जाते थे।
  2. सांस्कृतिक आदान-प्रदान: शिलालेखों का मिलना दर्शाता है कि भारतीय व्यापारी वहाँ केवल माल बेचने नहीं जाते थे, बल्कि वे वहां रुकते थे और संभवतः उनकी अपनी बस्तियां या गोदाम भी वहाँ मौजूद थे।
  3. समुद्री मार्ग की पहचान: इतिहासकार मानते हैं कि भारतीय नाविक ‘मानसूनी हवाओं’ (Trade Winds) के ज्ञान का उपयोग कर हिंद महासागर को पार कर लाल सागर के तटों तक पहुँचते थे।

इतिहासकारों की नजर में खोज का महत्व

पुरातत्वविदों का कहना है कि यह खोज भारत और मिस्र के बीच के ‘लिंक’ को और मजबूत करती है:

  • वैश्विक पहचान: यह शिलालेख तमिल भाषा की प्राचीनता और उसकी वैश्विक पहुँच को सिद्ध करते हैं।
  • रोमन कनेक्शन: मिस्र उस समय रोमन साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय व्यापारियों की पहुंच रोमन बाजारों के केंद्र तक थी।
  • पुरातत्व विभाग का उत्साह: भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व विभागों ने इस खोज को दक्षिण एशियाई इतिहास के पुनर्लेखन के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना है।

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