गुवाहाटी/कोलकाता (21 मार्च, 2026):पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। राज्य में चुनावी सरगर्मियों के बीच, तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी, जिसमें 17 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है। इस कदम से साफ संकेत मिलता है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी इस बार असम में केवल उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने का इरादा रखती है।
सियासी हलचल तेज: तृणमूल की पहली सूची और चुनावी रणनीति
असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राज्य की सियासत में हलचल तेज है। सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) और विपक्षी कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच सीधे मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की इस पहली सूची ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के संकेत दिए हैं। पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी और वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह सूची जारी की है, जो असम में पार्टी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विविधता और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर: अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में असम की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है:
- क्षेत्रीय संतुलन: पार्टी ने राज्य के सभी महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसमें ब्रह्मपुत्र घाटी (असमिया भाषी बहुल), बराक घाटी (बंगाली भाषी बहुल) और राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बोडोलैंड (BTR) क्षेत्र शामिल हैं।
- सामुदायिक प्रतिनिधित्व: उम्मीदवारों की सूची में अलग-अलग समुदायों और जनजातियों के नेताओं को जगह दी गई है, ताकि पार्टी राज्य के व्यापक सामाजिक ताने-बाने को साध सके। इसमें चाय बागान श्रमिकों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और स्वदेशी समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रयास किया गया है।
असम में तृणमूल का विस्तार: ममता बनर्जी का विजन
ममता बनर्जी पिछले कुछ समय से पूर्वोत्तर भारत में तृणमूल कांग्रेस के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही हैं। त्रिपुरा और मेघालय के बाद अब असम में पार्टी की सक्रियता बढ़ गई है:
- ‘दीदी’ का करिश्मा: पार्टी को उम्मीद है कि ममता बनर्जी का करिश्मा और पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार द्वारा लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाएं असम के मतदाताओं को आकर्षित करेंगी।
- संगठनात्मक मजबूती: पिछले कुछ महीनों में तृणमूल कांग्रेस ने असम में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया है और सदस्यता अभियान चलाया है।





