सीरिया से बशर अल-असद के भागने और विद्रोही संगठनों के देश के अधिकतर इलाकों पर कब्जे के बाद पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र पर बनी हुई है। दरअसल, सीरिया 2011 के बाद से ही तनावग्रस्त क्षेत्र रहा है, जहां विद्रोहियों ने बीते 13 वर्षों में बशर शासन के खिलाफ बड़े-छोटे स्तर पर जंग छेड़ रखी थीं। इस जंग में बशर शासन और विद्रोहियों के समर्थक के तौर पर अलग-अलग देशों के गठबंधन खड़े थे। हालांकि, सीरिया से असद के भागने के बाद अब इन सभी देशों ने अपने-अपने लिहाज प्रतिक्रियाएं दी हैं।
अमेरिकी रक्षा मुख्यालय व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन व उनकी टीम हालात पर नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने इसके बाद खुद कहा कि हम सीरिया के सभी समूहों को जोड़कर एक आजाद, स्वायत्त सीरिया बनाने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि सीरिया में अब तक जो कुछ हुआ है, उसके लिए असद की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सीरिया में असर सरकार का समर्थन करने वाले रूस ने विद्रोहियों के सीरिया पर कब्जे को लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया है। दरअसल, सीरिया में बड़ी संख्या में रूसी सुरक्षाबल तैनात हैं। हालांकि, विद्रोहियों ने उनके सैन्य ठिकानों की सुरक्षा की गारंटी दी है। असद के सीरिया से भागने से पहले रूस के विदेश मंत्री ने कहा था कि देश को आतंकी समूहों के हाथ में पड़ने से रोकना होगा।
दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र ने असद शासन के अंत को एक अहम घटना करार दिया है। सीरिया में यूएन के राजदूत ने कहा कि हम सावधानी भरी उम्मीद से आगे के हालात पर नजर रखे हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं देश में शांति और स्थायित्व देखने को मिलेगा, जिसमें सारे सीरियाई नागरिक एक साथ होंगे।





