बारामती/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार, जिनका हाल ही में एक दुखद विमान हादसे में निधन हो गया था, आज राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पैतृक शहर बारामती में आयोजित अंतिम संस्कार में जनसमूह का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सड़कें छोटी पड़ गईं। नम आंखों और ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारों के बीच पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और मातमी धुन के साथ अंतिम विदाई दी।
अंतिम यात्रा: जनसैलाब और सिसकियां
अजित पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके निजी आवास पर रखा गया था, जहाँ सुबह से ही राजनीतिक दिग्गजों और आम जनता का ताँता लगा रहा।
- भावुक क्षण: जब उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई, तो फूलों से सजे ट्रक पर उनके पार्थिव शरीर को देखकर समर्थकों की सिसकियां गूंज उठीं।
- बारामती बंद: अपने प्रिय नेता के सम्मान में बारामती के बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान स्वतः स्फूर्त बंद रहे। हर घर की खिड़की और छत से लोग अपने ‘दादा’ की अंतिम झलक पाने को बेताब दिखे।
शामिल हुए दिग्गज: दलगत राजनीति से ऊपर दिखी संवेदना
अजित पवार के अंतिम संस्कार में विचारधाराओं की दीवारें ढहती नजर आईं। देश और प्रदेश के तमाम बड़े नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुँचे:
- शरद पवार का दुख: परिवार के मुखिया और वरिष्ठ नेता शरद पवार अपने भतीजे के पार्थिव शरीर के पास बेहद भावुक नजर आए। पूरा पवार परिवार इस घड़ी में एक साथ खड़ा दिखा।
- प्रमुख उपस्थिति: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
शाम के वक्त स्थानीय श्मशान घाट पर सुरक्षा बलों ने हवा में गोलियां दागकर उन्हें सलामी दी।
- विधि-विधान: पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और राजकीय प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की गई। उनके पुत्रों ने उन्हें मुखाग्नि दी, जिसके बाद समूचा माहौल गमगीन हो गया।
- सुरक्षा व्यवस्था: भारी भीड़ को देखते हुए बारामती में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
एक युग का अंत: राजनीति में खालीपन
अजित पवार को उनकी प्रशासनिक पकड़, स्पष्टवादिता और विकास कार्यों के लिए जाना जाता था। विशेष रूप से बारामती के कायाकल्प में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना निकट भविष्य में कठिन होगा।
“महाराष्ट्र ने आज एक ऐसा बेटा खो दिया है जो जमीन से जुड़ा था और जिसके पास राज्य के विकास का स्पष्ट विजन था। अजित दादा का जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है।” — देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री





