Monday, January 12, 2026

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अल्मोड़ा: भिकियासैंण अस्पताल में नवजात की मौत के बाद भारी हंगामा; परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

भिकियासैंण/अल्मोड़ा: अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रसव के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की घोर लापरवाही के कारण उनके बच्चे की जान गई है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कई घंटों तक तनाव की स्थिति बनी रही, जिसे शांत करने के लिए स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भिकियासैंण क्षेत्र की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था।

  • देरी से उपचार का आरोप: परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के काफी समय बाद तक भी महिला को उचित डॉक्टरी सहायता नहीं मिली। स्टाफ द्वारा बार-बार आश्वासन दिया गया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर भी विशेषज्ञों को नहीं बुलाया गया।
  • शिशु की मौत: प्रसव के कुछ ही देर बाद नवजात की मृत्यु हो गई। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

अस्पताल में भारी विरोध प्रदर्शन

शिशु की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंच गए।

  • स्टाफ पर दुर्व्यवहार का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मौत का कारण पूछा, तो अस्पताल के कर्मचारियों ने संतोषजनक जवाब देने के बजाय उनके साथ अभद्रता की।
  • कार्यवाही की मांग: आक्रोशित लोगों ने अस्पताल के मुख्य गेट पर धरना दिया और दोषी चिकित्साकर्मियों के खिलाफ तत्काल निलंबन और कानूनी कार्यवाही की मांग की।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

  1. जांच समिति का गठन: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने मामले का संज्ञान लेते हुए एक आंतरिक जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत प्राकृतिक थी या चिकित्सा में चूक हुई।
  2. डॉक्टरों का पक्ष: अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रसव के दौरान जटिलताएं (Complications) अधिक थीं और उन्होंने बच्चे को बचाने का पूरा प्रयास किया था।

क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

भिकियासैंण की इस घटना ने पहाड़ की चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं की एक बार फिर पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेफरल सेंटर होने के बावजूद यहाँ अक्सर विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक उपकरणों की कमी रहती है, जिसका खामियाजा निर्दोष ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।

निष्कर्ष: न्याय की गुहार

पीड़ित पिता ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि “हमने अपना बच्चा खो दिया है, लेकिन हम चाहते हैं कि इसकी जांच हो ताकि किसी और के साथ ऐसा न हो।” फिलहाल, परिजनों के लिखित शिकायती पत्र के आधार पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अग्रिम कार्रवाई में जुट गए हैं।

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