तवांग/नई दिल्ली: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले (High Altitude) क्षेत्रों में अपनी सैन्य शक्ति का जबरदस्त प्रदर्शन किया है। सेना के पूर्वी कमान ने चीन सीमा से सटे अग्रिम इलाकों में एक वृहद युद्धाभ्यास का आयोजन किया, जिसमें स्वदेशी तोपों, रॉकेट प्रणालियों और आधुनिक ड्रोन्स ने अपनी मारक क्षमता का परिचय दिया। ‘शून्य से नीचे’ के तापमान और ऑक्सीजन की कमी वाले इन क्षेत्रों में भारतीय तोपों की गूंज ने बीजिंग को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
मारक क्षमता का प्रदर्शन: एम-777 और पिनाका ने दिखाया दम
इस शक्ति प्रदर्शन के दौरान भारतीय सेना ने अपनी सबसे घातक युद्धक प्रणालियों का परीक्षण किया:
- एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर: बोइंग और चिनूक हेलीकॉप्टरों के जरिए ऊंचे पहाड़ों पर तैनात की गई इन तोपों ने सटीक गोलाबारी कर काल्पनिक ठिकानों को ध्वस्त किया।
- पिनाका रॉकेट प्रणाली: मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर्स (MBRL) ने चंद सेकंडों में कई रॉकेट दागकर दुश्मन के संचार तंत्र को नष्ट करने का अभ्यास किया।
- स्वदेशी हथियार: इस अभ्यास में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनी के-9 वज्र तोपों और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों (ALH Rudra) का भी उपयोग किया गया।
रणनीतिक तैयारी: ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ का समन्वय
सेना ने केवल हथियारों का ही नहीं, बल्कि नई युद्ध नीतियों का भी परीक्षण किया:
- रात में युद्ध का अभ्यास: अंधेरे में दुश्मन की गतिविधियों को भांपने के लिए आधुनिक थर्मल इमेजर और नाइट विजन उपकरणों के साथ सघन पेट्रोलिंग का अभ्यास किया गया।
- ड्रोन सर्विलांस: सीमा पार की हलचल पर नजर रखने के लिए ‘स्वार्म ड्रोन्स’ का उपयोग किया गया, जो दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक जानकारी देने में सक्षम हैं।
- लॉजिस्टिक मजबूती: पहाड़ों की ऊंचाइयों पर कम समय में भारी रसद और हथियार पहुँचाने की प्रक्रिया (Rapid Deployment) को भी परखा गया।
चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन द्वारा सीमा पर बुनियादी ढांचे के विस्तार और नई बस्तियां (Xiaokang villages) बसाने की कोशिशों के जवाब में भारत का यह युद्धाभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- सुरक्षा घेरा: सेना ने अरुणाचल के तवांग और कामेंग सेक्टर में अपनी उपस्थिति को और अधिक सघन कर दिया है।
सड़क और टनल: सेला टनल जैसे प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद अब सेना के लिए भारी टैंकों को सीमा तक ले जाना आसान हो गया है, जिसका प्रदर्शन इस युद्धाभ्यास में भी दिखा।





