अमेरिका ने पाकिस्तान स्थित उग्रवादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को विदेशी आतंकवादी संगठन (Foreign Terrorist Organization – FTO) घोषित कर दिया है। यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है जब पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं और वॉशिंगटन में शीर्ष राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि बीएलए, जिसे “द मजीद ब्रिगेड” के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और इसका इतिहास हिंसक विद्रोह और निर्दोष नागरिकों पर हमलों से भरा हुआ है।
पहले भी लग चुकी है मोहर
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने बीएलए को आतंकी ठहराया हो। वर्ष 2019 में भी इसे “स्पेशली डिज़िगनेटेड ग्लोबल टेररिस्ट” (SDGT) घोषित किया गया था। उस समय संगठन ने पाकिस्तान में कई घातक हमलों की जिम्मेदारी ली थी, जिनमें सुरक्षाबलों और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया था।
हालिया आतंकी घटनाएं
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, बीएलए ने 2024 में कराची हवाई अड्डे और ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी परिसर के पास आत्मघाती हमले किए थे। वहीं, मार्च 2025 में इस संगठन ने क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का अपहरण कर 300 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया था। इस घटना में 31 लोगों की मौत हुई, जिनमें नागरिक और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल थे।
अमेरिका का कहना है कि बीएलए की गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इस फैसले के तहत अमेरिका में बीएलए की किसी भी प्रकार की वित्तीय, रसद या अन्य सहायता को प्रतिबंधित किया जाएगा और इससे जुड़े व्यक्तियों पर भी कार्रवाई होगी।
पाकिस्तान में बलूच विद्रोह का संदर्भ
बीएलए बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय एक विद्रोही समूह है, जो दशकों से पाकिस्तान से अलगाव की मांग करता रहा है। यह समूह खुद को बलूच लोगों के अधिकारों का रक्षक बताता है, लेकिन पाकिस्तान और अब अमेरिका की नजर में यह एक आतंकवादी संगठन है। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना का एक अहम हिस्सा है, जिस पर बीएलए कई बार हमला कर चुका है।
मुनीर की यात्रा के दौरान फैसला
इस घोषणा का समय भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस वक्त अमेरिका में हैं। उन्होंने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग, रक्षा संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा हो रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि बीएलए को एफटीओ घोषित करने का अमेरिकी फैसला पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक जीत है, जिससे उसे अपने विद्रोह-रोधी अभियानों में अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह कदम अमेरिका की रणनीतिक जरूरतों का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान के सहयोग को अफगानिस्तान, ईरान और चीन से जुड़े मुद्दों पर अहम माना जा रहा है।





