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अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर, एअर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय यात्री संख्या 35 प्रतिशत घटी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर भारतीय विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। हवाई क्षेत्र में प्रतिबंध और उड़ानों के मार्ग में बदलाव के कारण एअर इंडिया समूह की अंतरराष्ट्रीय यात्री संख्या में करीब 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

डीजीसीए के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय एयरलाइनों की अंतरराष्ट्रीय सेवाएं प्रभावित हुई हैं। एअर इंडिया और उसकी सहयोगी एयर इंडिया एक्सप्रेस समेत अन्य कंपनियों को कई उड़ानों के मार्ग बदलने या सेवाएं रद्द करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

हवाई क्षेत्र बंद होने से बढ़ी परेशानी

संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया के कई महत्वपूर्ण हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं। इसके कारण भारत से यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के लिए उड़ानों को वैकल्पिक और लंबे रास्तों से संचालित करना पड़ रहा है। इससे उड़ान समय और ईंधन की खपत दोनों बढ़ रही हैं। भारतीय विमानन कंपनियों पर परिचालन लागत का अतिरिक्त दबाव भी बढ़ा है।

खाड़ी क्षेत्र पर भारतीय एयरलाइंस की निर्भरता

भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में पश्चिम एशिया की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। दुबई, दोहा और अन्य खाड़ी शहर यूरोप और अमेरिका जाने वाले भारतीय यात्रियों के प्रमुख ट्रांजिट केंद्र हैं। ऐसे में क्षेत्रीय हवाई मार्गों में व्यवधान का असर सीधे यात्रियों की संख्या और एयरलाइंस के कारोबार पर पड़ रहा है।

यात्रियों की बढ़ी चिंता

उड़ानों में बदलाव, रद्दीकरण और लंबे रूट के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, एयरलाइंस को भी परिचालन व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर भारतीय विमानन कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, किराए और यात्री मांग पर आगे भी पड़ सकता है।

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