नई दिल्ली: देश के सभी आधिकारिक और सरकारी कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल में एक बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नवीन दिशानिर्देशों (गाइडलाइंस) के अनुसार, अब सभी सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगान के समापन के पश्चात ‘वंदे मातरम्’ के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक सामान्यतः वंदे मातरम् के केवल प्रथम पद का ही गायन किया जाता था, लेकिन नई नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक विरासत से नई पीढ़ी को पूरी तरह अवगत कराना है।
नई गाइडलाइन की मुख्य बातें: क्या हुआ है बदलाव?
संबंधित मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए:
- पूर्ण गायन की अनिवार्यता: अब केवल “वंदे मातरम्, सुजलां सुफलां…” तक सीमित न रहकर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित मूल गीत के सभी 6 छंदों का सस्वर पाठ या गायन किया जाएगा।
- क्रम का निर्धारण: प्रोटोकॉल के तहत सबसे पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ होगा और उसके तुरंत बाद पूरे सम्मान के साथ वंदे मातरम् का गायन संपन्न किया जाएगा।
- समय का ध्यान: हालांकि 6 छंदों के गायन में अधिक समय लगेगा, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसकी गरिमा और लय के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ऐतिहासिक महत्व और सरकार का उद्देश्य
सरकार ने इस निर्णय के पीछे सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी तर्क दिए हैं:
- क्रांतिकारियों का सम्मान: सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् के सभी छंदों ने क्रांतिकारियों को ऊर्जा दी थी। पूर्ण गीत का गायन उन बलिदानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
- सांस्कृतिक चेतना: नई पीढ़ी को इस कालजयी रचना के पूर्ण अर्थ और भाव से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है।
- एकता का संदेश: आधिकारिक आयोजनों में इस परंपरा को शामिल कर राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशिक्षण और क्रियान्वयन की तैयारी
गाइडलाइन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासन ने व्यापक योजना तैयार की है:
- सुर और लय का प्रशिक्षण: सभी सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्टाफ और गायन मंडलियों को सभी 6 छंदों की सही लय और उच्चारण का अभ्यास कराएं।
- डिजिटल रिकॉर्डिंग: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय जल्द ही वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण की एक आधिकारिक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जारी करेगा, जिसका उपयोग कार्यक्रमों के दौरान किया जा सकेगा।
- निजी संस्थानों के लिए परामर्श: फिलहाल यह सरकारी कार्यक्रमों के लिए अनिवार्य है, लेकिन निजी संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों से भी इसे स्वेच्छा से अपनाने का आग्रह किया गया है।





