Tuesday, February 3, 2026

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अफगानिस्तान में महिलाओं पर एक और प्रहार: तालिबान ने गर्भनिरोधक दवाओं पर लगाई रोक; बताया ‘पश्चिमी साजिश’, घर-घर जाकर दी जा रही चेतावनी

काबुल: अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान प्रशासन ने महिलाओं की स्वतंत्रता और स्वास्थ्य अधिकारों को प्रतिबंधित करने की दिशा में एक और विवादित कदम उठाया है। तालिबान ने पूरे देश में गर्भनिरोधक दवाओं (Contraceptives) और परिवार नियोजन के अन्य साधनों के उपयोग व बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। तालिबान के ‘सदाचार मंत्रालय’ के अधिकारियों ने इसे “पश्चिमी देशों की साजिश” करार दिया है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम आबादी को नियंत्रित करना है। इस नए फरमान के बाद काबुल और मज़ार-ए-शरीफ़ जैसे बड़े शहरों में दवा की दुकानों (फार्मेसी) से गर्भनिरोधक सामग्री को जबरन हटवा दिया गया है।

फरमान का कार्यान्वयन: बंदूकों के साये में ‘चेकिंग’

स्थानीय सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, तालिबान इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए डराने-धमकाने का सहारा ले रहा है:

  • दवा दुकानों पर छापेमारी: तालिबान लड़ाके दवा विक्रेताओं के पास जाकर स्टॉक की जांच कर रहे हैं और उन्हें चेतावनी दे रहे हैं कि यदि कोई भी गर्भनिरोधक दवा बेचते पाया गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
  • मिडवाइव्स को निर्देश: सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में काम करने वाली दाइयों (मिडवाइव्स) को निर्देश दिया गया है कि वे महिलाओं को परिवार नियोजन के लिए कोई भी सलाह या दवा उपलब्ध न कराएं।
  • घर-घर तलाशी: कुछ इलाकों में ऐसी खबरें भी आई हैं कि तालिबान के अधिकारी घर-घर जाकर महिलाओं को धमका रहे हैं कि वे बच्चों के जन्म को रोकने के लिए किसी भी “विदेशी तकनीक” का सहारा न लें।

तालिबान का तर्क: “मुस्लिम आबादी का संरक्षण”

तालिबान के प्रवक्ताओं और धार्मिक नेताओं ने इस फैसले के पीछे अपने कट्टरपंथी विचारों को आधार बनाया है:

  1. धार्मिक कारण: तालिबान का कहना है कि परिवार नियोजन इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है और हर बच्चे का जन्म ‘ईश्वर की इच्छा’ है।
  2. साजिश का दावा: तालिबान के एक स्थानीय कमांडर ने कहा कि पश्चिमी देश इन दवाओं के जरिए अफगान संस्कृति और मुस्लिम आबादी की वृद्धि को नष्ट करना चाहते हैं।

स्वास्थ्य संकट और मानवाधिकारों का उल्लंघन

इस प्रतिबंध ने अफगानिस्तान में पहले से ही बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं:

  • मात्र मृत्यु दर में वृद्धि का डर: संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान में पहले से ही दुनिया की सबसे खराब मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) है। गर्भनिरोधकों पर रोक से अनचाहे गर्भ और प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।
  • आर्थिक बोझ: भीषण गरीबी और भुखमरी से जूझ रहे अफगान परिवारों के लिए और अधिक बच्चों का पालन-पोषण करना एक बड़ा मानवीय संकट पैदा कर देगा।

वैश्विक स्तर पर निंदा

मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम को “महिलाओं के शरीर और उनके जीवन पर नियंत्रण करने की एक और कोशिश” बताया है:

  • शिक्षा के बाद अब स्वास्थ्य: स्कूल और यूनिवर्सिटी से लड़कियों को बाहर करने के बाद, अब स्वास्थ्य सुविधाओं पर यह हमला तालिबान के कट्टरपंथी एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय दबाव: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तालिबान पर दबाव डालें ताकि महिलाओं के बुनियादी स्वास्थ्य अधिकारों को बहाल किया जा सके।

“यह फैसला केवल दवाओं पर रोक नहीं है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा पर सीधा हमला है। इससे न केवल महिलाओं का जीवन जोखिम में पड़ेगा, बल्कि अफगानिस्तान का भविष्य और अधिक अंधकारमय हो जाएगा।” — मानवाधिकार कार्यकर्ता

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