मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ‘विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो’ (AAIB) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। एजेंसी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसमें लगी भीषण आग की चपेट में आने से दोनों महत्वपूर्ण रिकॉर्डर— फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) बुरी तरह जल गए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि विमान के इन दोनों हिस्सों का जलना जांच प्रक्रिया के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यही वे उपकरण हैं जिनसे हादसे के अंतिम क्षणों की सटीक जानकारी मिल सकती थी।
जांच में क्यों अहम हैं ये रिकॉर्डर?
विमान के पिछले हिस्से में स्थित इन रिकॉर्डरों (जिन्हें आमतौर पर ‘ब्लैक बॉक्स’ कहा जाता है) का काम हादसे की गुत्थी सुलझाना होता है:
- फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR): यह विमान की ऊँचाई, गति, इंजन के प्रदर्शन और तकनीकी मापदंडों का रिकॉर्ड रखता है।
- कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR): यह पायलटों के बीच हुई बातचीत और कॉकपिट के भीतर की ध्वनियों को रिकॉर्ड करता है।
- चुनौती: AAIB के अनुसार, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इन रिकॉर्डरों की बाहरी सुरक्षात्मक परत भी झुलस गई है। अब वैज्ञानिक तरीके से इनके भीतर की चिप से डेटा निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
AAIB की जांच के मुख्य बिंदु
हादसे की जगह से साक्ष्य जुटाने के बाद AAIB ने अपनी जांच को तीन मुख्य दिशाओं में केंद्रित किया है:
- तकनीकी विफलता: क्या विमान के इंजन या नियंत्रण प्रणाली में कोई खराबी थी? रिकॉर्डर जलने के कारण अब विशेषज्ञों को मलबे के भौतिक विश्लेषण (Physical Analysis) पर निर्भर रहना पड़ेगा।
- मानवीय चूक: पायलटों के अंतिम संदेशों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के डेटा की समीक्षा की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि क्या उस वक्त कोई गलत फैसला लिया गया था।
- आग लगने का कारण: जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि क्या आग विमान के टकराने से पहले लगी थी या टकराने के बाद ईंधन टैंक फटने से।
विशेषज्ञों की राय: ‘डेटा रिकवरी के लिए विदेश भेजे जा सकते हैं रिकॉर्डर’
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में इन जले हुए रिकॉर्डरों से डेटा नहीं निकाला जा सका, तो इन्हें विशेष लैब के लिए अमेरिका (NTSB) या फ्रांस (BEA) भेजा जा सकता है।
- जटिल प्रक्रिया: जले हुए सर्किट से डेटा को डिकोड करना एक समय लेने वाली और जटिल प्रक्रिया है।
- बैकअप डेटा: जांच एजेंसियां अब रडार डेटा और ग्राउंड कंट्रोल की रिकॉर्डिंग का सहारा ले रही हैं ताकि हादसे की कड़ियाँ जोड़ी जा सकें।





