वाशिंगटन। अमेरिका में आयोजित विभिन्न वैश्विक संगोष्ठियों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक दक्षिण और विकासशील देशों के सामने मौजूदा चुनौतियों पर प्रकाश डाला और बहुपक्षवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देश आज अनेक संकटों और जटिल वैश्विक परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, जिसमें आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
विकासशील देशों की चुनौतियां
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक दक्षिण को विकास और स्थिरता के रास्ते पर बनाए रखने के लिए सशक्त सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारी की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल एक-दो शक्तिशाली राष्ट्रों की नीतियों पर निर्भर रहकर समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए देशों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर निर्णय लेने और साझा हितों के आधार पर रणनीति बनाने की जरूरत है।
बहुपक्षवाद का महत्व
विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद ही भविष्य की दिशा है। उन्होंने कहा, “आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सभी देशों को समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा। यह जरूरी है कि वैश्विक दक्षिण के देशों के हितों को पर्याप्त महत्व दिया जाए और उन्हें अंतरराष्ट्रीय नीति निर्धारण में सक्रिय भागीदार बनाया जाए।”
वैश्विक दक्षिण को संदेश
जयशंकर ने वैश्विक दक्षिण के देशों से अपील की कि वे एकजुट हों और संयुक्त रूप से वैश्विक मंच पर अपने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक हितों की रक्षा करें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, और अन्य विकासशील देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए तैयार है।
भारत का दृष्टिकोण
विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति का भी उल्लेख किया, जिसमें संतुलित बहुपक्षीय कूटनीति, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक सहयोग और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में रहेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि विकासशील देशों की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुनी जाए।
जयशंकर के इस भाषण ने वैश्विक दक्षिण के देशों को एकजुट होने और बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनका संदेश स्पष्ट है: वैश्विक चुनौतियों का समाधान साझा प्रयास और सहयोग के माध्यम से ही संभव है।





