नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बीच वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका को लेकर एक बड़ी खोज की है। बर्फ की मोटी चादरों के नीचे 85 नई झीलों का पता चला है, जो अब तक विज्ञान की नज़रों से ओझल थीं। इस खोज ने न केवल ध्रुवीय क्षेत्रों की भूगर्भीय संरचना को लेकर नई जानकारियां दी हैं, बल्कि भविष्य में समुद्र स्तर वृद्धि के पूर्वानुमानों पर भी बड़ा असर डाल सकती है।
उपग्रहों से मिली नई जानकारी
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने उन्नत उपग्रह तकनीक और बर्फ के भीतर सेंसर आधारित सर्वेक्षण के जरिए इन झीलों की मौजूदगी दर्ज की। अब तक अंटार्कटिका में लगभग 400 झीलें दर्ज थीं, लेकिन इस नई खोज के बाद इनकी संख्या 500 से अधिक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये झीलें हजारों साल पुरानी हो सकती हैं और इनका सीधा संबंध बर्फ की स्थिरता से है।
समुद्र स्तर वृद्धि से जुड़ी बड़ी चिंता
वैज्ञानिकों का कहना है कि अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे मौजूद ये झीलें बर्फ की परतों की गति को प्रभावित करती हैं। यदि जलवायु परिवर्तन की वजह से झीलों का पानी समुद्र की ओर बहना शुरू हुआ तो समुद्र स्तर में अप्रत्याशित तेजी से वृद्धि हो सकती है। अभी तक के अनुमान इस खोज से बदल सकते हैं और आने वाले दशकों में तटीय शहरों के लिए खतरा और गहरा सकता है।
जलवायु मॉडल में आएगा बदलाव
इस अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा है कि इन झीलों की पहचान के बाद अब जलवायु मॉडल को नए सिरे से तैयार करना होगा। झीलों के जलस्तर और उनके समुद्र से संभावित संपर्क का अध्ययन करने से भविष्य के पूर्वानुमान ज्यादा सटीक हो सकेंगे।
वैज्ञानिकों के लिए अनुसंधान का नया क्षेत्र
इन झीलों को जैव विविधता और सूक्ष्मजीव विज्ञान की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बर्फ के नीचे लाखों साल से बंद ये झीलें अद्वितीय और प्राचीन जीवाणुओं का घर हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो यह पृथ्वी पर जीवन के विकास और अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को समझने में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में अंटार्कटिका में और भी झीलों का पता चल सकता है। यह खोज वैश्विक जलवायु संकट को लेकर चेतावनी है कि समुद्र स्तर बढ़ोतरी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। शोधकर्ता अब इन झीलों की संरचना, जलराशि और समुद्र से संपर्क को लेकर विस्तृत अध्ययन करेंगे।





