देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर मचे घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले नेता ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि उत्तराखंड की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और सरकार इस पूरे मामले में मौन साधे बैठी है।
इस्तीफे की मुख्य वजह
त्यागपत्र देने वाले नेता ने सोशल मीडिया और प्रेस को जारी बयान में कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के मुद्दे पर सरकार का रवैया निराशाजनक रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जघन्य हत्याकांड के ‘वीआईपी’ अपराधी के नाम का खुलासा करने में देरी की जा रही है, जिससे जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। उनके अनुसार, जिस देवभूमि में महिलाओं को सर्वोपरि माना जाता है, वहां एक बेटी को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो कि पार्टी की नीतियों के खिलाफ है।
सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल
इस्तीफे में सीधे तौर पर सरकार की घेराबंदी करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
- अस्मिता से समझौता: नेता का आरोप है कि राज्य सरकार कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिससे उत्तराखंड की मान-मर्यादा को ठेस पहुँची है।
- नैतिकता का हवाला: उन्होंने कहा कि जब पार्टी और सरकार जनभावनाओं को समझने में विफल हो जाए, तो पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता।
- न्याय में देरी: अंकिता के माता-पिता द्वारा लगातार उठाई जा रही मांगों पर सरकार की कथित अनदेखी को इस्तीफे का मुख्य कारण बताया गया है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस इस्तीफे के बाद उत्तराखंड भाजपा के भीतर खलबली मच गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि जब सत्ताधारी दल के अपने ही नेता सुरक्षित और संतुष्ट महसूस नहीं कर रहे हैं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती है।
क्या है अंकिता भंडारी मामला?
ज्ञात हो कि ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या के बाद पूरे राज्य में भारी जनाक्रोश देखने को मिला था। इस मामले में मुख्य आरोपी रिजॉर्ट मालिक है, जो एक पूर्व भाजपा नेता का बेटा है। लंबे समय से इस मामले में ‘वीआईपी’ गेस्ट की पहचान उजागर करने की मांग की जा रही है, जो अब राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया है।
अगला कदम: भाजपा प्रदेश संगठन इस इस्तीफे को स्वीकार करने या नेता को मनाने की कोशिशों में जुटा है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





