नई दिल्ली (12 मार्च, 2026): संसद के बजट सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर चल रही तीखी बहस के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की गरिमा और नियमावली को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सदन में अनुपस्थिति और उनके बोलने के समय को लेकर उठाए गए सवालों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पीकर ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र का यह मंदिर किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा से नहीं, बल्कि स्थापित नियमों और परंपराओं से चलता है। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि देश के प्रधानमंत्री भी जब सदन में वक्तव्य देते हैं, तो उससे पहले विधिवत नोटिस दिया जाता है।
स्पीकर की दोटूक: ‘नियमों के ऊपर कोई नहीं’
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जब विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के तुरंत जवाब देने की मांग को लेकर शोर-शराबा शुरू किया, तो ओम बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा:
- नोटिस की अनिवार्यता: स्पीकर ने कहा, “माननीय सदस्य गण ध्यान रखें कि यह सदन नियमों से बंधा है। यहाँ तक कि देश के प्रधानमंत्री भी जब सदन में बोलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले नोटिस देना पड़ता है। बिना पूर्व सूचना और तय प्रक्रिया के किसी को भी बोलने या बुलाने का दबाव नहीं बनाया जा सकता।”
- सदन की स्वायत्तता: उन्होंने जोर देकर कहा कि “सदन किसी व्यक्ति का नहीं है,” बल्कि यह जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है जो संविधान के दायरे में काम करती है।
- विपक्ष को नसीहत: ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से आग्रह किया कि वे अविश्वास प्रस्ताव पर हो रही चर्चा में तथ्यों के साथ अपनी बात रखें, न कि केवल शोर मचाकर कार्यवाही को बाधित करें।
अविश्वास प्रस्ताव पर गरमाई बहस
सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा:
- विपक्ष का तर्क: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि गंभीर वैश्विक और घरेलू संकटों के बावजूद सरकार जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि वे स्वयं सामने आकर इन मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करें।
- सत्ता पक्ष का जवाब: सरकार की ओर से दलील दी गई कि प्रधानमंत्री नियमानुसार चर्चा के अंत में जवाब देंगे। उन्होंने विपक्ष पर संसदीय मर्यादाओं को तोड़ने और बेवजह का हंगामा खड़ा करने का आरोप लगाया।
- संसदीय परंपरा: भाजपा सांसदों ने पूर्व के उदाहरण देते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जवाब देने का एक तय समय होता है और विपक्ष उसे अपनी मर्जी से संचालित नहीं कर सकता।
सदन की कार्यवाही में गतिरोध
स्पीकर की स्पष्ट व्यवस्था के बावजूद, सदन में हंगामा कम नहीं हुआ। विपक्ष ने ‘प्रधानमंत्री सदन में आओ’ के नारे लगाए, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। ओम बिरला ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और बहस को सुचारू रूप से चलाने की अपील की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा।





