बीजिंग/वॉशिंगटन (12 मार्च, 2026): जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध और खाड़ी संकट पर टिकी हैं, तब चीन इस वैश्विक अस्थिरता का फायदा उठाकर अपनी महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को नई धार दे रहा है। बीजिंग में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी नई ‘पंचवर्षीय योजना’ (Five-Year Plan) को हरी झंडी दे दी है। इस योजना का मुख्य केंद्र अमेरिका के साथ संभावित भविष्य के संघर्ष की तैयारी और सैन्य-तकनीकी क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ड्रैगन’ जानबूझकर ईरान संकट में दुनिया के उलझे होने का लाभ उठाकर अपनी सामरिक घेराबंदी मजबूत कर रहा है।
चीन की नई रणनीति: युद्ध की आड़ में शक्ति विस्तार
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में मंजूर की गई इस नई योजना के तहत चीन ने तीन प्रमुख मोर्चों पर काम करने का संकल्प लिया है:
- सैन्य आधुनिकीकरण: योजना में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बजट में भारी बढ़ोतरी का प्रावधान है। चीन अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) संचालित हथियारों और हाइपरसोनिक मिसाइलों के बेड़े को दोगुना करने जा रहा है।
- अमेरिकी चुनौती का सामना: बीजिंग ने स्पष्ट किया है कि वह प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए अपनी नौसेना को ‘ब्लू वॉटर नेवी’ के रूप में पूरी तरह विकसित करेगा।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता: अमेरिका द्वारा लगाए गए सेमीकंडक्टर प्रतिबंधों के जवाब में चीन ने अगले 5 वर्षों में चिप निर्माण और अंतरिक्ष तकनीक में स्वावलंबी बनने का लक्ष्य रखा है।
ईरान संकट और चीन का दोहरा खेल
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, चीन इस समय एक ‘स्मार्ट पावर’ की तरह व्यवहार कर रहा है:
- अमेरिका का ध्यान भटकाना: ईरान और इजरायल के युद्ध में अमेरिका के उलझने से चीन को दक्षिण चीन सागर (South China Sea) और ताइवान जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने का सुनहरा अवसर मिल गया है।
- ऊर्जा सुरक्षा की चिंता: युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद चीन ने ईरान और रूस के साथ अपने गुप्त समझौतों के जरिए ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है।
- मध्यस्थ की भूमिका का ढोंग: चीन वैश्विक मंच पर खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, जबकि पर्दे के पीछे वह उन ताकतों को मजबूत कर रहा है जो अमेरिकी हितों को चोट पहुँचा सकती हैं।
वैश्विक समीकरणों पर प्रभाव
चीन की इस नई पंचवर्षीय योजना ने वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है:
- ताइवान पर बढ़ता खतरा: रक्षा विशेषज्ञों का अंदेशा है कि यदि अमेरिका मध्य पूर्व के युद्ध में गहराई से फंस जाता है, तो चीन इस मौके का फायदा उठाकर ताइवान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
- नई आर्थिक घेराबंदी: चीन अपनी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) को अब सैन्य सुरक्षा के साथ जोड़ने की तैयारी में है, ताकि उसके वैश्विक निवेश को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाया जा सके।




